का सरल उत्तर
गीता (11/54) के अनुसार अनन्य भक्ति से ही ईश्वर को तत्त्व से जाना और देखा जा सकता है। अध्याय 12 (भक्तियोग) में श्रद्धापूर्वक उपासना करने वाले को सर्वोत्तम योगी कहा गया है। भक्ति सबसे सुगम और श्रेष्ठ मार्ग है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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