का सरल उत्तर
हवन की भस्म: मंत्र 'ॐ त्र्यायुषं जमदग्नेः...' से अभिमंत्रित करके ललाट (माथा), ग्रीवा (कंठ), दक्षिण बाहुमूल (भुजाएं) और हृदय पर लगाएं। शिव पुराण: नित्य भस्म धारण = संपूर्ण तीर्थों और यज्ञों का फल स्वतः।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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