का सरल उत्तर
शतपथ ब्राह्मण: 'एतध्दै प्रत्यक्षाद्यज्ञरूपं यद् घृतम्' — घृत = साक्षात् यज्ञ का स्वरूप। गोघृत = अग्निहोत्र की सर्वोत्कृष्ट और सर्वाधिक पवित्र सामग्री। अग्नि को प्रदीप्त करने का मुख्य साधन और वातावरण में ऑक्सीजन वृद्धि करता है।
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