का सरल उत्तर
शरीर, वाणी और मन से की गई प्रत्येक क्रिया कर्म है। शुभ कर्म सुख देते हैं, अशुभ दुख। गीता का उपदेश है — फल की आसक्ति छोड़कर निष्काम भाव से कर्म करो।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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