का सरल उत्तर
इसे 'गुप्त लिंग' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह गुह्य विद्या और साधना प्रधान है। इसकी ऊर्जा केवल विशिष्ट मंत्रों, ध्यान और ब्रह्म मुहूर्त में ही जाग्रत होती है, जो आत्म-जागृति के लिए है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।