का सरल उत्तर
आध्यात्मिक अर्थ: (1) पुरुषार्थ — बाहर काम, भीतर मोक्ष (2) तांत्रिक शिव-शक्ति ऐक्य प्रतीक (3) 'काम पार कर मोक्ष जाओ' (4) शिल्पशास्त्र का विधान (5) वज्रपात रक्षा मान्यता। तथ्य: केवल ~10% मूर्तियाँ कामुक — 90% देवता/नर्तक/दैनिक जीवन। अश्लीलता नहीं — दार्शनिक चित्रण।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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