का सरल उत्तर
सूर्य का प्रकाश सत्यलोक तक पहुँचता तो है पर ब्रह्मा की असीम कांति के सामने निस्तेज हो जाता है — जैसे सूर्य के सामने दीपक।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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