का सरल उत्तर
'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' — तीन नेत्रों वाले (भूत-वर्तमान-भविष्य के ज्ञाता) शिव की आराधना। जैसे खरबूजा पकने पर बेल से स्वतः मुक्त होता है — वैसे हे शिव! हमें मृत्यु और भौतिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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