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सरल उत्तर

महर्लोक के श्लोक 'यथा मेढीस्तम्भ' का तात्विक अर्थ क्या है?

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यथा मेढीस्तम्भ श्लोक (भागवत ५.२३.३) कहता है — जैसे खंभे से बंधे पशु परिक्रमा करते हैं वैसे ही सभी ग्रह-नक्षत्र ध्रुवलोक के चारों ओर कल्पांत तक परिक्रमा करते हैं। महर्लोक इस चक्र से परे है।

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