का सरल उत्तर
दक्षिणायन = पितृयान, उत्तरायण = देवयान। मकर संक्रांति = दक्षिणायन की समाप्ति + पितरों की विदाई का दिन → तर्पण अनिवार्य। विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण: इस दिन पितर श्राद्ध-तर्पण करने वाला अनंत फल का भागी।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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