का सरल उत्तर
मंत्र को देवता का 'शब्द-शरीर' (नादमय-शरीर) इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें उस देवता की ऊर्जा, चेतना और शक्ति बीज रूप में गुप्त रहती है — तंत्र के अनुसार यह शिव और शक्ति का अविभाज्य रूप है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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