का सरल उत्तर
यह व्रत मृत्यु और अज्ञान के भय से मुक्ति पाने, अहंकार का नाश करने और पुराने पापों व कर्मबंधनों को काटने के लिए किया जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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