का सरल उत्तर
मस्तक काटने का आध्यात्मिक अर्थ: अहंकार का विनाश + अद्वैत चेतना की प्राप्ति। यह आत्म-बलिदान, जीवन-मृत्यु चक्र की स्वीकृति और कुंडलिनी के प्रचंड जागरण का प्रतीक। स्मरण मात्र से साधक सदाशिव स्वरूप हो जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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