का सरल उत्तर
जो दौहित्र प्रतिपदा को नाना-नानी का तर्पण और पिण्डदान करता है, उसके घर में असीम सुख, शांति और सम्पन्नता का वास होता है। यह केवल कर्तव्य-पूर्ति नहीं — पितृकुल और मातृकुल के मध्य आध्यात्मिक सेतु का निर्माण करता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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