माया क्या है शंकराचार्य के अनुसार?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
माया = वह शक्ति जिससे एक ब्रह्म अनेक (जगत) दिखता है। न सत् न असत् — 'अनिर्वचनीय।' दो शक्तियाँ: आवरण (सत्य ढकना) और विक्षेप (भ्रम दिखाना)। जादूगर का जादू जैसी — ब्रह्म अप्रभावित। ब्रह्मज्ञान से माया नष्ट = मोक्ष।
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