मंदिर की वास्तु में वास्तु पुरुष मंडल का क्या अर्थ है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
दिव्य पुरुष भूमि पर लेटा = 81/64 खाने = मंडल। केंद्र (पेट) = ब्रह्मस्थान = गर्भगृह। ईशान (शिर) = शुभ (जल/पूजा)। नैऋत्य (पैर) = स्थिर। हर मंदिर/घर = मंडल अनुसार।
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