मंदिर में भगवान को पंखा झलने की सेवा का क्या अर्थ है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
राजसेवा (भगवान=राजा), सुख (गर्मी दूर), वायु शुद्धि, षोडशोपचार (व्यजन), दास भाव। चामर (याक)/चंदन पंखा। जगन्नाथ/श्रीनाथजी = विशेष भक्त अनुमति।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
मंदिर सेवा
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।