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सरल उत्तर

मंदिर में दान देने का शास्त्रीय विधान क्या है?

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गीता: सही स्थान-काल-पात्र + बिना प्रत्युपकार = सात्विक दान (श्रेष्ठ)। प्रकार: अन्न (सर्वोत्तम), धन (हुंडी), वस्त्र, गो-दान, तेल/घी। नियम: श्रद्धा, गोपनीयता, दाहिने हाथ से, सामर्थ्यानुसार। शुभ समय: एकादशी, संक्रांति, ग्रहण। दबाव/भय से दान = वर्जित।

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