का सरल उत्तर
पारम्परिक मत: स्मृति ग्रंथों में 4-5 दिन निषेध — शुचिता की अवधारणा। शाक्त परम्परा (कामाख्या): पवित्र माना जाता है। भक्ति परम्परा: आन्तरिक भाव प्रधान। आधुनिक दृष्टि: व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परम्परा का विषय। मूल उद्देश्य: स्वास्थ्य-विश्राम।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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