का सरल उत्तर
नारद भक्तिसूत्र: भक्ति का परिपाक — सिद्धता, अमृतत्व, तृप्ति। अनुभव के रूप: भाव-विभोरता (अश्रु, रोमांच), विचार-शून्यता, दिव्य अनुभूति। शर्त: श्रद्धा, नियमितता, शुद्ध भाव। अनुभव खोजने से नहीं, भक्ति के परिपाक से स्वतः आता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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