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सरल उत्तर

मंदिर में वस्त्र दान करने का क्या महत्व है?

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वस्त्र दान = महापुण्य (पद्मपुराण)। दो प्रकार: देवता को अर्पण (षोडशोपचार अंग) + निर्धन को (लज्जा-रक्षा = परम पुण्य)। नवीन-स्वच्छ दें, फटे/मैले नहीं। संक्रांति, ग्रहण, श्राद्ध — विशेष शुभ। फल: सौन्दर्य, यश, लक्ष्मी कृपा, पितर तृप्ति।

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