का सरल उत्तर
हां, परंपरा में मान्यता। कारण: अहंकार दोष, दृष्टि दोष (ईर्ष्या), ऊर्जा बिखराव। अथर्वशीर्ष: 'अपात्र को न दें।' न बताएं: दीक्षा मंत्र, संख्या, अनुभव। बता सकते: सार्वजनिक मंत्र। सार: गोपनीयता = श्रेष्ठ।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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