का सरल उत्तर
अत्यंत शुभ: देवता उपस्थिति, सिद्धि निकट, अनाहत चक्र जागरण। शांत रहें, अहंकार नहीं। गुरु को बताएं। अनुभव व्यक्तिगत।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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