मंत्र जप में 1008 संख्या क्यों महत्वपूर्ण है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
1008 = 1000 (पूर्णता) + 8 (अष्टसिद्धि)। सहस्रनाम = 1000 नाम — एक पाठ = 1000 जप तुल्य। मध्यम साधक की नित्य संख्या। विशेष दिन (एकादशी, महाशिवरात्रि) पर 1008। नव-चक्र (9×108≈1008) = ब्रह्मांडीय पूर्णता। 108 नित्य, 1008 विशेष, 10000+ अनुष्ठान।
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