मंत्र जप में भ्रामरी प्राणायाम का क्या लाभ है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
भ्रामरी जप में: ध्वनि अभ्यास (नाद शुद्धि), तुरंत एकाग्रता, आज्ञा चक्र सक्रिय, तनाव मुक्ति, स्वर शुद्धि। जप से पहले 3-7 बार। 'म्म्म.../ॐ' गुंजन → कम्पन भ्रूमध्य अनुभव। जप बाद भी = गहन ध्यान। कान बंद करके।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
मंत्र साधना
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।