भ्रामरी जप में: ध्वनि अभ्यास (नाद शुद्धि), तुरंत एकाग्रता, आज्ञा चक्र सक्रिय, तनाव मुक्ति, स्वर शुद्धि। जप से पहले 3-7 बार। 'म्म्म.../ॐ' गुंजन → कम्पन भ्रूमध्य अनुभव। जप बाद भी = गहन ध्यान। कान बंद करके।
- 1ध्वनि अभ्यास: भ्रामरी में 'म्म्म...' गुंजन करना = मंत्र जप में नाद (ध्वनि) का अभ्यास। यह मंत्र उच्चारण की शुद्धता बढ़ाता है।
- 2एकाग्रता: भ्रामरी से मन तुरंत शांत और एकाग्र होता है। जप से ठीक पहले 3-5 बार भ्रामरी = गहन एकाग्र जप।
- 3आज्ञा चक्र सक्रियता: गुंजन की ध्वनि कम्पन (vibration) आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) को सक्रिय करती है = अन्तर्दृष्टि, ध्यान गहरा।
- 4चिंता-तनाव मुक्ति: भ्रामरी तनाव, चिंता, क्रोध को तुरंत शांत करती है। शांत मन = प्रभावी जप।
- 5स्वर शुद्धि: नियमित भ्रामरी से कण्ठ (गला) शुद्ध होता है = मंत्र उच्चारण स्पष्ट और सुमधुर।