का सरल उत्तर
जप = मानसिक यज्ञ (गीता: 'जपयज्ञोऽस्मि')। हवन = भौतिक (अग्नि = देवमुख)। दशांश (जप→हवन) = सिद्धि। जप+हवन = amplified। पुरश्चरण: जप→हवन→तर्पण→मार्जन→दान।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।