मंत्र जप से आत्मज्ञान कैसे प्राप्त होता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
नाम और नामी अभेद (भागवत 11.14.26): जप-परिपाक = साधक-भगवान भेद मिटे। मार्ग: जप → अहंकार-क्षय → सोऽहं (प्रतिदिन 21,600 स्वतः) → तुरीय-बोध। विवेकचूडामणि: जप = श्रवण-मनन-निदिध्यासन की पूर्व-भूमिका। जप प्रत्यक्ष नहीं — भूमि तैयार करता है।
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मंत्र जप
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