का सरल उत्तर
उपाय: (1) नियमितता = सबसे महत्वपूर्ण। (2) संख्या क्रमशः बढ़ाएं। (3) पुरश्चरण। (4) विशेष तिथि (नवरात्रि/ग्रहण)। (5) ब्रह्मचर्य+सात्विक। (6) गुरु कृपा। (7) श्रद्धा भाव। (8) मौन व्रत। (9) एकाग्रता (जप+ध्यान)। (10) गोपनीयता।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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