मंत्र सिद्धि में ध्यान क्यों जरूरी है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
मंत्रमहार्णव: ध्यान-रहित जप = पाप (बिना अग्नि यज्ञ जैसा)। तंत्रालोक: मंत्र-सिद्धि का त्रिभुज = जप + ध्यान + भाव। ध्यान क्यों: देवता से मंत्र जोड़ता है, मन की ऊर्जा एकाग्र होती है, चित्त शुद्ध होता है। ध्यान-सहित 108 जप > ध्यानरहित 1008 जप।
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