का सरल उत्तर
मृगी मुद्रा = अंगूठा + मध्यमा + अनामिका से आहुति देना। शांतिकर्मों और सामान्य देव-यज्ञ के लिए सर्वाधिक शुभ और उपयुक्त।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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