का सरल उत्तर
नमः शिवाय जप से उत्पन्न आध्यात्मिक अग्नि जन्म-जन्मांतर के संचित पाप-कर्मों और कुसंस्कारों को भस्म करके चित्त को निर्मल बनाती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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