का सरल उत्तर
नवधा भक्ति (प्रह्लाद द्वारा हिरण्यकशिपु को उपदेश): (1) श्रवण, (2) कीर्तन, (3) स्मरण, (4) पादसेवन, (5) अर्चन, (6) वंदन, (7) दास्य, (8) सख्य, (9) आत्मनिवेदन। सर्वोच्च = आत्मनिवेदन (पूर्ण समर्पण)।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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