का सरल उत्तर
नवार्ण मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।' कलश और अखंड ज्योति की ऊर्जा में इस मंत्र का जप = मूलाधार की सुप्त कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होकर षट्चक्रों का भेदन।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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