का सरल उत्तर
'नमः शिवाय' (पंचाक्षर) कोई भी जप कर सकता है — लेकिन 'ॐ नमः शिवाय' (षडाक्षर) जपने का अधिकार केवल गुरु-दीक्षा के बाद मिलता है क्योंकि गुरु कृपा से ही प्रणव की पूर्ण शक्ति जाग्रत होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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