का सरल उत्तर
पश्यन्ती = दृष्टिगोचर वाणी। केंद्र: हृदय चक्र। यहाँ बोलने की इच्छा (इच्छा शक्ति) बीज रूप में जन्म लेती है — विचार एक अस्पष्ट ध्वनि (वाइब्रेटरी नाद) या रंग के रूप में सूक्ष्म मन में उभरता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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