पितरों के लिए जल कैसे चढ़ाएं विधि सहित
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
दक्षिण मुख → तांबे पात्र (जल+काले तिल) → दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ) से → 'गोत्राय... तिलोदकं तृप्यतु' → 3 बार अर्पित → भूमि/तुलसी में। जनेऊ दाहिने कंधे। पिता जीवित = पितृ तर्पण नहीं (कुछ परंपरा)।
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श्रेणी
श्राद्ध एवं पितृ कर्म
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