पितरों के लिए जल कैसे चढ़ाएं विधि सहित
की चेकलिस्ट
दक्षिण मुख → तांबे पात्र (जल+काले तिल) → दाहिने हाथ (पितृ तीर्थ) से → 'गोत्राय... तिलोदकं तृप्यतु' → 3 बार अर्पित → भूमि/तुलसी में। जनेऊ दाहिने कंधे। पिता जीवित = पितृ तर्पण नहीं (कुछ परंपरा)।
- 1समय — प्रातः स्नान बाद; या दोपहर।
- 2दिशा — दक्षिण की ओर मुख करें (पितर = दक्षिण)।
- 3सामग्री — तांबे/मिट्टी पात्र में जल + काले तिल।
- 4हाथ — दाहिने हाथ से अर्पित; अंगूठे और तर्जनी के बीच से (पितृ तीर्थ)।
- 5मंत्र (सरल):
- 63 बार जल अर्पित करें।
- 7अंत: जल भूमि पर गिरने दें (किसी पेड़/तुलसी में भी)।
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श्रेणी
श्राद्ध एवं पितृ कर्म
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