का सरल उत्तर
सरलतम: 'ॐ पितृभ्यो नमः' 108 बार। पितृ गायत्री। महामृत्युंजय (1,25,000 जप)। गीता 15वाँ अध्याय। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'। दक्षिण दिशा, काले तिल माला, प्रातःकाल।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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