का सरल उत्तर
फूल चढ़ाना भगवद्गीता से प्रमाणित है — कृष्ण ने स्वयं फूल अर्पण स्वीकारा। फूल प्राकृतिक सौंदर्य और प्राण शक्ति का समर्पण है, प्रेम और त्याग का प्रतीक है। ताजे, खंडित रहित, न सूँघे हुए फूल ही चढ़ाएं। प्रत्येक देवता के प्रिय फूल अलग हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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