का सरल उत्तर
'प्राण' = जीवन शक्ति और 'प्रतिष्ठा' = स्थापना — अर्थात् मूर्ति में देवता की जीवन-शक्ति, चेतना और समस्त इंद्रियों को स्थापित करना ताकि वे भक्तों की पूजा साक्षात् ग्रहण कर सकें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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