का सरल उत्तर
अभिमंत्रण में रत्न को स्वच्छ आसन पर स्थापित करके संकल्प लेकर अधिष्ठात्री देवी का मंत्र 108 बार जपते हैं — प्रत्येक उच्चारण से देवी की प्राण-शक्ति रत्न में स्थापित होकर उसे जड़ से चैतन्य बनाती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।