का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण और भागवत के अनुसार रत्नों का उद्गम दैत्यराज बलि के महायज्ञ से हुआ — वामन अवतार में भगवान के चरण स्पर्श से बलि का शरीर विभिन्न रत्नों में परिवर्तित होकर भू-मंडल पर बिखर गया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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