का सरल उत्तर
ऋग्वेद (1.3.12): 'महो अर्णः सरस्वती प्र चेतयति केतुना। धियो विश्वा वि राजति॥' अर्थ: हे सरस्वती! अपने ज्ञान के महासागर से हमें प्रबुद्ध करें, संपूर्ण ब्रह्मांड और हमारी बुद्धि को आलोकित करें। फल: भौतिक ज्ञान से परे 'परा विद्या' (ब्रह्मज्ञान) की ओर उन्मुखता।
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