का सरल उत्तर
सच्चिदानंद = सत् (शाश्वत अस्तित्व) + चित् (शुद्ध चेतना/ज्ञान) + आनंद (परम सुख)। यह ब्रह्म और आत्मा का स्वरूप है। तैत्तिरीय उपनिषद — 'सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म'। सरल अर्थ: मैं हूं + मैं जानता हूं + मैं आनंदित हूं = आत्मा का मूल स्वभाव।
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