का सरल उत्तर
संध्या के प्रमुख राग हैं — यमन (शांति-भव्यता), पूर्वी (गहरी भावुकता), मारवा (आत्मिक व्याकुलता), श्री (भव्यता-भक्ति)। इन रागों में तीव्र मध्यम की विशेषता है। संध्याकाल प्रकृति का संगम है और ये राग मन को आंतरिक संध्या-वंदन की ओर ले जाते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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