का सरल उत्तर
यह व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन रात में चाँद निकलने (चंद्रोदय) के समय चतुर्थी तिथि मौजूद हो। इसे 'चंद्रोदय-व्यापिनी' नियम कहते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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