संन्यास लिए बिना मोक्ष मिल सकता है क्या
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
हाँ — गीता 5.2-6 'कर्मयोगो विशिष्यते' (कर्म योग संन्यास से श्रेष्ठ)। राजा जनक = गृहस्थ, जीवनमुक्त। असली संन्यास = आसक्ति का आंतरिक त्याग, गेरुआ वस्त्र नहीं। गृहस्थ रहकर निष्काम कर्म + भक्ति + वैराग्य = मोक्ष।
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