का सरल उत्तर
आरती: कर्पूर जलाकर देवी की आरती करें। मंत्र: 'कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्...' अंत में हाथ में पुष्प लेकर 'अनेन पूजनेन...' से क्षमा याचना करें। आरती = समर्पण की पराकाष्ठा।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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