का सरल उत्तर
सरीसृप योनि में पितर को श्राद्ध-तर्पण वायु के रूप में प्राप्त होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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